मंगलवार, 9 अक्तूबर 2012

लिंग (श्रेष्ठ सृजन का प्रतीक व आधार)पूजा को अश्लील कहने वालो से मेरे कुछ जरूरी सवाल

ॐ श्री महागणेशाय नमः

सभी धर्मपालकों ( हिन्दुओ ) का विरोध करने वाले जो लिंग पूजा को अश्लील मानते हैं सिर्फ़ उनसे ही मै कुछ सवाल करना चाहता हुं  और आशा करता हुं कि वे इस लेख मे पूछे गये सवालो का ही जवाब देंगे और इन्ही बिंदुओं पर केंद्रित रहेंगे

(१). लिंग (श्रेष्ठ सृजन का प्रतीक व आधार)पूजा को अश्लील मानने वालो की द्रुष्टी मे क्या स्त्री और पुरुष का विवाह भी अश्लील है । यदि लिंग एक अश्लील शब्द या अन्ग है तो उनकी क्या मज्बूरी है इस अश्लील जीवन को जीने की

(२). लिंग(श्रेष्ठ सृजन का प्रतीक व आधार) पूजा को अश्लील मानने वाले क्या पति-पत्नि के पवित्र संबन्धो को भी अश्लील मानते हैं क्या यदि हाम तो इन मूर्खो की इन सम्बन्धो मे बंधने की क्या आवशयकता है

(३).लिंग(श्रेष्ठ सृजन का प्रतीक व आधार) पूजा को अश्लील मानने वाले क्या पति-पत्नि के पवित्र मिलन ( एसा सिर्फ़ हिन्दु मानते है शायद बाकी तो इसे अश्लीलता का हे नाम देते होंगे ) से जन्मे बच्चों को भी अश्लील्ता का प्रमाण मानते हैं क्या

(४).लिंग(श्रेष्ठ सृजन का प्रतीक व आधार) पूजा को अश्लील मानने वाले क्या अपने माता-पिता के पवित्र सम्बन्धो को भी अश्लीलता मानते हैं

(५).लिंग(श्रेष्ठ सृजन का प्रतीक व आधार) पूजा को अश्लील मानने वाले क्या अपने जन्म को भी अश्लीलता का प्रमाण मानते हैं

(६). लिंग(श्रेष्ठ सृजन का प्रतीक व आधार) पूजा को अश्लील मानने वाले क्या अपने बच्चों के जन्म को भी अश्लीलता मानकर खुशियां न मनाकर शर्म व घृणा से मुह मुह फ़ेर लेते हैं

(७).लिंग(श्रेष्ठ सृजन का प्रतीक व आधार) पूजा को अश्लील मानने वाले क्या अपने पूजनीयों , आदर्णीयों ,अवतारो व देवो आदि के जन्म को भी अश्लीलता का प्रमाण ही मानते हैं क्या

यदि वास्तव मे एसे लोग लिंग(श्रेष्ठ सृजन का प्रतीक व आधार) पूजा और संबन्धित बिंदुओ को सिर्फ़ अश्लीलता ही मानते है तो एसे लोगों को एसा जीवन जीने की कोई आवश्यकता नही है और न ही क्युंकि  एसे लोगों का जीवन उनके स्व्यं के अनुसार ही अश्लील हो जाता है मै एसे घृणित सोच रखने वालों से जवाब की इच्छा रखता हुं

1 टिप्पणी:

  1. दिक्कत यह है कि आज हिन्दू लोग अपना धर्म और संस्कृति भूल चुकें है और उस पर गोरान्वित होने की जगह लज्जित होते है दूसरों के अपने धर्म पर इलज़ाम लगाने पर. हिन्दू धर्म में काम कोई पाप नहीं अपितू धर्म व जीवन का एक अभिन्न अंग है.

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